कब होता है कुंडली में राजयोग?

राजयोग कुंडली में एक महत्वपूर्ण ग्रहों और योगों का संयोजन है जो एक व्यक्ति को सामरिक और आर्थिक महत्वपूर्ण स्थान प्रदान कर सकता है। राजयोग के कुछ प्रमुख योग निम्नलिखित हैं:

  1. गजकेसरी योग: गजकेसरी योग का निर्माण चंद्रमा (मून) और गुरु (बृहस्पति) के संयोग से होता है। यदि चंद्रमा और गुरु एक कुंडली में एकत्र हों और पापग्रहों से मुक्त हों, तो यह योग बनता है। इस योग का प्रभाव व्यक्ति को सम्मान, धन, सत्ता और स्थान प्रदान करता है।
  2. हंस योग: हंस योग चंद्रमा (मून) और शुक्र (शुक्र) के संयोग से बनता है। चंद्रमा और शुक्र एक कुंडली में मिलते हैं और पापग्रहों से मुक्त होते हैं, तो यह योग उत्पन्न होता है। यह योग व्यक्ति को राजनीतिक और सामाजिक सफलता प्रदान कर सकता है।
  3. धन योग: धन योग का निर्माण लग्न (आरंभ भाव) और पंचम (सन्तान भाव) में धन के स्थान प्रमुख ग्रहों के संयोग से होता है। यदि लग्न और पंचम भाव में शुक्र, गुरु या बृहस्पति आपस में संयुक्त हों, तो यह योग उत्पन्न होता है। धन योग व्यक्ति की आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकता है।
  4. राजलक्ष्मी योग: राजलक्ष्मी योग का निर्माण लग्न (आरंभ भाव) और द्वादश (भाग्य भाव) में स्थित ग्रहों के संयोग से होता है। यदि लग्न और द्वादश भाव में ग्रहों की महत्वपूर्ण स्थिति और महत्वपूर्णता हो, तो राजलक्ष्मी योग उत्पन्न होता है। यह योग व्यापारिक और आर्थिक सफलता प्रदान कर सकता है।

ये कुछ प्रमुख राजयोग हैं जो कुंडली में पाए जा सकते हैं। कुंडली में राजयोग के होने पर व्यक्ति को शुभ फल प्राप्त हो सकता है, लेकिन राजयोग का पूरा प्रभाव केवल कुंडली के अन्य योगों, ग्रहों और दशाओं के संयोजन पर निर्भर करता है। किसी भी कुंडली में एकाधिक राजयोग हो सकते हैं और ये व्यक्ति की जीवनमार्ग में उन्नति करने में मदद कर सकते हैं।

कुंडली मे राज योग कब बनता हैं

कुंडली में राजयोग के बनने के लिए ग्रहों के संयोग एवं स्थान का महत्वपूर्ण योगदान होना चाहिए। राजयोग की विशेषता यह है कि वह व्यक्ति के लिए शुभ फल प्रदान करता है। इसके लिए निम्नलिखित कुछ मुख्य ग्रहों और उनके स्थानों का महत्वपूर्ण योगदान होना आवश्यक होता है:

  1. सूर्य (Sun): लग्न या केंद्र भाव में स्थित होने पर राजयोग बनता है।
  2. चंद्रमा (Moon): लग्न, केंद्र या क्षेत्रीय भाव में स्थित होने पर राजयोग बनता है।
  3. मंगल (Mars): केंद्र या त्रिकोण भाव में स्थित होने पर राजयोग बनता है।
  4. बृहस्पति (Jupiter): केंद्र, क्षेत्रीय या त्रिकोण भाव में स्थित होने पर राजयोग बनता है।
  5. शुक्र (Venus): केंद्र या त्रिकोण भाव में स्थित होने पर राजयोग बनता है।
  6. शनि (Saturn): केंद्र, क्षेत्रीय या त्रिकोण भाव में स्थित होने पर राजयोग बनता है।
  7. राहु (Rahu) और केतु (Ketu): केंद्र, क्षेत्रीय या त्रिकोण भाव में स्थित होने पर राजयोग बनता है।

कुंडली में राजयोग के लाभ

कुंडली में राजयोग के होने के कई लाभ हो सकते हैं। निम्नलिखित तत्वों में से कुछ मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:

  1. सामरिक सफलता: राजयोग कुंडली में अद्वितीय शक्ति और प्रभाव का प्रतीक होता है। यह व्यक्ति को सामरिक सफलता, सम्मान और प्रभावशाली स्थिति प्रदान कर सकता है।
  2. आर्थिक उन्नति: राजयोग कुंडली में धन और समृद्धि के योग का प्रतीक होता है। यह व्यक्ति को आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकता है और उसे धन, संपत्ति और आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
  3. शास्त्रीय शिक्षा और ज्ञान: राजयोग कुंडली में विद्या, ज्ञान और शास्त्रीय शिक्षा के योग का प्रतीक हो सकता है। यह व्यक्ति को शिक्षा में सफलता प्रदान कर सकता है और उसे उच्चतर ज्ञान स्तर तक पहुंचने में मदद कर सकता है।
  4. सामाजिक स्थान: राजयोग कुंडली में सामाजिक स्थान और प्रतिष्ठा के योग का प्रतीक हो सकता है। यह व्यक्ति को सामाजिक मंच पर पहचान, प्रतिष्ठा और सम्मान प्रदान कर सकता है।
  5. स्वास्थ्य और शारीरिक विकास: राजयोग कुंडली में स्वास्थ्य और शारीरिक विकास के योग का प्रतीक हो सकता है। यह व्यक्ति को अच्छे स्वास्थ्य, शक्ति और ऊर्जा प्रदान कर सकता है।

ये थे कुछ मुख्य लाभ जो एक व्यक्ति को राजयोग कुंडली में होने पर प्राप्त हो सकते हैं। हालांकि, यह लाभ व्यक्ति की कुंडली के अनुसार भिन्न हो सकते हैं और अन्य ग्रहों और योगों के संयोग के साथ भी संबंधित हो सकते हैं।

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