विवाह के लिए कुंडली मिलान

कुंडली मिलान विवाह के लिए ज्योतिष के अनुसार एक महत्वपूर्ण विचार है। ज्योतिष शास्त्र में मान्यता है कि व्यक्ति की जन्म कुंडली में छिपी ग्रहों की योग्यता के माध्यम से उनके भविष्य में साथी के साथ समारूपता का विश्लेषण किया जा सकता है। विवाह के लिए यह आवश्यक है कि दोनों पार्टनरों के कुंडली में योग्यता हो, जिससे कि वे एक दूसरे के साथ सम्बंधों, स्वभाव, स्वास्थ्य, वित्तीय स्थिति, परिवार, आदि के संबंध में संगत हों।

कुंडली मिलान के लिए, विशेष रूप से निम्नलिखित महत्वपूर्ण गुणों का महत्वपूर्ण ध्यान दिया जाता है:

  1. गुण मिलान (अष्टकूट गुण मिलान): इसमें विवाह के लिए 36 गुणों की गणना की जाती है, जिनमें से हर गुण कोई-न कोई महत्वपूर्ण धारा को प्रतिष्ठित करता है। यह धाराएं जैसे कि वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, भकूट आदि हो सकती हैं। इन गुणों की मिलान एक व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और संतानों के प्रति समर्पण के संकेत के रूप में देखे जाते हैं।
  2. दोष निवारण: कुंडली मिलान के दौरान, दोष निवारण का भी महत्वपूर्ण ध्यान दिया जाता है। अगर किसी कुंडली में मंगल दोष, कालसर्प दोष, पितृ दोष, नाडी दोष आदि हों, तो उन्हें निवारण किया जाना चाहिए ताकि कुंडली में नकारात्मक प्रभाव कम हो सके।
  3. ग्रहों का प्रभाव: ग्रहों का महत्वपूर्ण भूमिका है जो कुंडली मिलान के दौरान ध्यान दिया जाता है। ग्रहों की स्थिति और योग्यता देखकर ज्योतिषी विवाह के समय के बारे में अधिक जानकारी दे सकते हैं, जैसे कि विवाह का शुभ मुहूर्त, ग्रह दोष का समाधान, आदि।

यदि इन सभी मापदंडों के आधार पर दोनों कुंडलियों में मेल होता है, तो ज्योतिषी कहते हैं कि विवाह के लिए योग्यता होती है और यह विवाह शुभ माना जा सकता है। यह तथ्यगत ज्ञान केवल सामान्य जानकारी के रूप में प्रदान किया जाता है और अक्सर व्यक्तिगत अनुभव, परिवार की प्राथमिकताएं, आदि के साथ जोड़कर विवाह का निर्णय लिया जाता है।

कुंडली मिलान के महत्वपूर्ण घर

कुंडली मिलान के लिए विवाह के लिए कुंडली के किस घर का महत्वपूर्ण है, इसका ज्योतिषीय महत्व अनुसार इस प्रकार है:

  1. लग्न घर (पहला घर): लग्न घर व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, दैनिक जीवन, आदि के संबंध में महत्वपूर्ण होता है। विवाह के लिए कुंडली मिलान में लग्न घर की स्थिति और योग्यता देखी जाती है। एक अच्छी लग्न घर की स्थिति और स्थानीय ग्रहों की सुखी स्थिति विवाह के लिए शुभ होती है।
  2. सप्तम घर (विवाह घर): सप्तम घर विवाह, साथी, पार्टनरशिप, संगठन, साझेदारी, संतान, आदि के संबंध में महत्वपूर्ण होता है। कुंडली मिलान में सप्तम घर की स्थिति, योग्यता, और विवाह के लिए समर्पण की क्षमता देखी जाती है। शुभ सप्तम घर वाले व्यक्ति के लिए विवाह की संभावना बढ़ जाती है।

यह दोनों घर कुंडली मिलान में महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इसके अलावा भी अन्य घरों की स्थिति, जैसे कि द्वादश घर (पितृ घर), द्वितीय घर (धन घर), पंचम घर (संतान घर), आदि भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं जो विवाह के लिए ध्यान में लिए जाते हैं। आपके ज्योतिषी कुंडली का विश्लेषण करके सभी घरों की महत्वपूर्णता को समझा सकेंगे और आपको उचित मार्गदर्शन प्रदान कर सकेंगे।

विवाह के लिए कितने और कौन से गुण उत्तम माने जाते हैं

विवाह के लिए कितने गुण सही माने जाते हैं और उनके बारे में कौन से गुण महत्वपूर्ण हैं, इसका ज्योतिषीय मान्यता निर्धारित करती है। ज्योतिष शास्त्र में विवाह के लिए 36 गुणों की गणना की जाती है, जिसे “अष्टकूट गुण मिलान” कहा जाता है। हर गुण कोई-न कोई महत्वपूर्ण धारा को प्रतिष्ठित करता है।

यहां कुछ महत्वपूर्ण गुणों की सूची है जिन्हें ज्योतिष में विशेष महत्व दिया जाता है:

  1. वर्ण (1 गुण): वर्ण गुण मिलान में वर्ण की समानता का महत्व होता है। वर्ण के आधार पर चार वर्ण – ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, में समानता होनी चाहिए।
  2. वश्य (2 गुण): वश्य गुण मिलान में व्यक्ति की प्रमुख आदान-प्रदान क्षमता और आकर्षण की योग्यता का महत्व होता है।
  3. तारा (3 गुण): तारा गुण मिलान में व्यक्ति की जन्मतारीख के आधार पर दोनों की तारों की संयुक्त दशा के आधार पर गणना की जाती है।
  4. योनि (4 गुण): योनि गुण मिलान में व्यक्ति की स्त्री या पुरुषत्व की गुणवत्ता का महत्व होता है। यह गुण संतानों के विषय में भी संकेत देता है।
  5. ग्रह मैत्री (5 गुण): ग्रह मैत्री गुण मिलान में ग्रहों के मध्य योग्यता, समझौता और समरसता की गणना की जाती है।
  6. गण (6 गुण): गण गुण मिलान में व्यक्ति की स्वभाव, प्रवृत्ति और व्यवहार की गुणवत्ता का महत्व होता है।
  7. भकूट (7 गुण): भकूट गुण मिलान में व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संबंधों की गुणवत्ता का महत्व होता है।
  8. नादी (8 गुण): नादी गुण मिलान में व्यक्ति के प्राकृतिक प्रवृत्ति, स्वास्थ्य और संतानों की गुणवत्ता का महत्व होता है।

ज्योतिष शास्त्र में इन गुणों के आधार पर मिलान किया जाता है और 36 गुणों का मेल होना विवाह के लिए आप्ति माना जाता है। यह गुणों का मेल विवाहीत जीवन की सामर्थ्य, समानता और समरसता की गणना करता है। यह हर ज्योतिषीय प्रथा और परंपरा के आधार पर अलग-अलग हो सकता है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने परिवार के ज्योतिषशास्त्रीय नियमों के अनुसार चलें।

कुंडली मिलान विवाह के लिए क्यों  महत्वपूर्ण कारक होते हैं।

कुंडली मिलान में विवाह के लिए कुछ महत्वपूर्ण कारक होते हैं। यहां हिंदी में उन महत्वपूर्ण कारकों की सूची है:

  1. गुण मिलान: कुंडली मिलान में व्यक्तियों के गुणों का मिलान होता है। यह गुणों की संख्या, गुणों की प्रकृति, दोषों की जांच, विशेष योगों की उपस्थिति, विपरीत गुणों की समानता, आदि के आधार पर होता है।
  2. नक्षत्र मिलान: नक्षत्र मिलान में दोनों के जन्मनक्षत्र का मिलान होता है। इसमें नक्षत्रों की संयुक्त दशा, नक्षत्रों की समानता, नक्षत्रों की प्राकृतिक संघर्ष, आदि का ध्यान रखा जाता है।
  3. भकूट मिलान: भकूट मिलान में दोनों के भकूट गुणों का मिलान होता है। यह व्यक्तियों के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संबंधों की माप करने में मदद करता है।
  4. दोष निवारण: कुंडली मिलान में दोषों की जांच और निवारण का महत्वपूर्ण स्थान होता है। यह दोषों की प्रकृति, दोषों के प्रभाव, दोषों के निवारण के योग्यता और उपाय, आदि का विचार करता है।
  5. ग्रह मैत्री: ग्रह मैत्री में ग्रहों के मध्य संघर्ष, समरसता और समझौता की माप की जाती है। यह व्यक्तियों के बीच ग्रहों के संयोग की जांच करता है।

ये कुछ महत्वपूर्ण कारक हैं जो कुंडली मिलान में ध्यान दिया जाता है। कुंडली मिलान द्वारा यह मापा जाता है कि विवाह के लिए दो व्यक्तियों का योग्यता का संघटित होना कितना संभव है।

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