शनिवार के दिन क्यों चढ़ाया जाता है शनिदेव को सरसों का तेल

शनिदेव को हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण देवता माना जाता है, जिनका विशेष पूजन शनिवार को किया जाता है। इस दिन भक्त शनिदेव की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विभिन्न उपायों का अनुसरण करते हैं, जिसमें सरसों का तेल चढ़ाना एक महत्वपूर्ण अंश है।

सरसों का तेल शनिदेव के पूजन में उपयुक्त है क्योंकि इसे शनि ग्रह के शांति के लिए सामंजस्यपूर्ण माना जाता है। शनि ग्रह की दशा और दृष्टि से बचने के लिए शनिदेव के प्रति विशेष भक्ति रखने वाले लोग सरसों के तेल से अपनी पूजा को समर्थन करते हैं।

शनिवार को सरसों का तेल चढ़ाना संस्कृति में एक प्राचीन परंपरा है जो भक्तों को शनिदेव के आशीर्वाद से समृद्धि और सुख-शांति प्रदान करने का मार्ग दिखाती है। इसके माध्यम से भक्त शनिदेव के कठिनाईयों से मुक्ति प्राप्त करते हैं और उनकी कृपा से जीवन को समृद्धि और आनंद से भर देते हैं।

क्या महिलाएं शनिदेव/Shani dev को तेल चढ़ा सकती हैं?

जी हां, महिलाएं शनिदेव को सरसों के तेल से चढ़ा सकती हैं, विशेषकर शनिवार को। इस परंपरागत प्रथा में, शनिदेव को समर्पित इस विशेष दिन पर, महिलाएं सरसों के तेल की थाली लेकर उसमें दीपक जलाती हैं और शनिदेव की पूजा करती हैं। यह मान्यता है कि इससे शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति को शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है।

शनिदेव किसका अवतार है?

शनि देव, हिन्दू धर्म में देवता का एक महत्वपूर्ण रूप है जिन्हें शनिश्चर भी कहा जाता है। वे ग्रहों में सुर्य पुत्र और चाय्या पुत्र हैं और इसलिए उन्हें चाय्यापुत्र शनि भी कहा जाता है। शनि देव का अवतार कृष्ण के बाल रूप में माना जाता है, और उनकी धारा एक तलवार के साथ दिखाई देती है।

शनि देव का अवतार मुख्य रूप से धर्म और न्याय के देवता के रूप में है। उन्हें कारण और फल के देवता के रूप में भी जाना जाता है, जो किसी भी कर्म के परिणाम को न्यायपूर्वक देने के लिए जाने जाते हैं। शनि देव को सातवें दिन के देवता भी माना जाता है, और शनिवार को उनकी पूजा की जाती है।

शनिदेव का अवतार भगवान शिव और पार्वती के पुत्र के रूप में भी माना जाता है। उनकी कड़ी तपस्या और भक्ति के बाद, भगवान शिव ने उन्हें अमरत्व और विशेष शक्तियों के साथ युक्त किया।

शनि देव का अवतार जीवन में न्याय और सत्य की प्रेरणा से भरा हुआ है, और उनकी पूजा से व्यक्ति को कठिनाईयों से निपटने की शक्ति मिलती है। वे भक्तों के कर्मों को न्यायपूर्वक फल देते हैं और उन्हें धर्म की मार्गदर्शन में मदद करते हैं। इसलिए, शनि देव का अवतार धर्म, न्याय, और सत्य के प्रति आदर्श बनाता है और उन्हें सफलता और शांति की प्राप्ति में मदद करता है।

शनिवार को क्या नहीं खरीदना चाहिए

शनिवार, हिन्दू पंचांग के अनुसार सप्ताह का सातवां दिन है और इसे शनिदेव के समर्पित किया जाता है। धार्मिक दृष्टिकोण से इस दिन का विशेष महत्व होता है और लोग इसे श्रद्धा भाव से बिताते हैं। शनिवार को कुछ चीजें नहीं खरीदनी चाहिए, जो इस दिन की महत्वपूर्णता को ध्यान में रखते हैं।

  1. सरसों का तेल: शनिवार को सरसों के तेल की खरीदारी से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शनिदेव को सरसों का तेल प्रिय नहीं है और इसे शनिवार को पूजा में नहीं लाना चाहिए।
  2. काला तिल: काला तिल भी शनिवार को नहीं खरीदा जाता है। इसे शनिदेव से असुख का संबंध माना जाता है और शनिवार को इसे खाने से बचना चाहिए।
  3. नीला वस्त्र: शनिवार को नीला वस्त्र नहीं खरीदना चाहिए, क्योंकि नीला रंग शनिदेव के प्रति आत्मनिर्भरता का प्रतीक है और इसे उनकी पूजा में शामिल नहीं करना चाहिए।
  4. लोहे का सामान: शनिवार को लोहे के सामान की खरीदारी भी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इसे शनिदेव से जुड़े संबंध से मुकाबला करना माना जाता है।
  5. शनिवार के बिना बाल कटवाना: धार्मिक दृष्टिकोण से शनिवार को बिना बाल कटवाए जाना चाहिए। यह शनिदेव को समर्पित होता है और इस दिन बाल कटवाना उचित नहीं माना जाता है।
  6. काली और भैरव मूर्तियाँ: काली और भैरव की मूर्तियाँ भी शनिवार को नहीं खरीदनी चाहिए। इन देवताओं के साथ शनिदेव का संबंध होता है और इसलिए इन्हें इस दिन नहीं खरीदना चाहिए।
  7. नीला वस्त्र: शनिवार को नीला वस्त्र नहीं खरीदना चाहिए, क्योंकि इस रंग को शनिदेव से अच्छा नहीं माना जाता है। इससे बचकर लोग शनिदेव के प्रति अधिक आदर भाव रख सकते हैं।

शनि दोष के लक्षण क्या है

  1. असुख और संबंध संकट: शनि दोष के अधिक प्रभाव के कारण व्यक्ति असुख से गुजर सकता है और संबंधों में संकटों का सामना कर सकता है। यह दोष विवाह या पारिवारिक जीवन में अस्तित्व में चुनौती पैदा कर सकता है।
  2. आर्थिक समस्याएं: शनि दोष के कारण व्यक्ति को आर्थिक समस्याएं आ सकती हैं। आर्थिक स्थिति में कमी, नौकरी की हानि या व्यापार में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
  3. स्वास्थ्य समस्याएं: शनि दोष के प्रभाव से व्यक्ति को स्वास्थ्य समस्याएं आ सकती हैं। दिल, जोड़ों, या कमर में दर्द, शरीर में ठंडक, और अन्य स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।
  4. विदेश यात्रा में बाधाएं: जन्मकुंडली में शनि दोष होने पर व्यक्ति को विदेश यात्रा में बाधाएं आ सकती हैं। यह यात्रा के लिए अनुकूल नहीं हो सकता है और विदेश जाने में कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है।
  5. अनिर्वाचनीय तनाव और चिंता: शनि दोष के कारण व्यक्ति अनिर्वाचनीय तनाव और चिंता महसूस कर सकता है। यह उसे मानसिक और आत्मिक तौर पर परेशान कर सकता है।
  6. कार्य में देरी और परेशानियां: शनि दोष के प्रभाव से व्यक्ति कार्य में देरी और परेशानियों का सामना कर सकता है। कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं और स्थिति में बदलाव के लिए समय लग सकता है।

शनिवार के उपाय

  1. पूजा और अर्चना: शनिवार को शनि देव की पूजा और अर्चना करना विशेष फलदायी है। शनि देव को नीला फूल, तिल, और उड़द की दाल से समर्पित करना शुभ माना जाता है।
  2. शनि शांति मंत्र जाप: शनि शांति मंत्रों का जाप करना भी शनिवार के उपाय में सम्मिलित किया जा सकता है। यह मंत्रों के प्रतिदिन नियमित जाप से शनि दोष को दूर करने में सहायक हो सकता है।
  3. नीला धातु धारण: शनिवार को नीला धातु के आभूषण धारण करना भी एक प्रमुख उपाय है। इसे धारण करने से शनि दोष को शांति मिल सकती है।
  4. अन्नदान: शनिवार को अन्नदान करना भी एक शुभ उपाय है। गरीबों को खाना पिलाकर शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।
  5. तिल-तेल का दान: शनिवार को तिल और तेल का दान करना भी शनि देव के प्रति श्रद्धाभाव से संतुष्टि प्राप्त करने में सहायक हो सकता है।
  6. पवित्र स्थानों की यात्रा: शनिवार को किसी पवित्र स्थान पर यात्रा करना भी एक उत्तम उपाय है। शनिदेव के मंदिरों में जाकर पूजा करना या किसी पवित्र सरोवर के किनारे जाकर स्नान करना शनि दोष को दूर करने में सहायक हो सकता है।
  7. शनि दोष निवारण मंत्र: शनि दोष को निवारण के लिए विशेष मंत्रों का उच्चारण भी किया जा सकता है। शनि दोष शांति मंत्र को नियमित रूप से जप करना यह सुनिश्चित कर सकता है कि व्यक्ति शनिदेव के क्रोध से मुक्ति प्राप्त कर सकता है।

शनिदेव की आरती

आरती श्री शनिदेव जी की

जय जय श्री शनिदेवा, करो कृपा हे शनिदेवा।

कृपा करो हे शनिदेवा, जय जय श्री शनिदेवा।

शमी पत्र से पूजा तुम्हारी,

करते भक्त नित्य यही संकीर्तन।

दिन में भक्त तुम्हारे गाएं,

रात्रि में देवी पुकारे नाम तुम्हारा।

जय जय श्री शनिदेवा, करो कृपा हे शनिदेवा।

कृपा करो हे शनिदेवा, जय जय श्री शनिदेवा।

ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र,

सब पुकारते तुम्हारे दरबार में।

शनि चालीसा पढ़कर भक्त तेरे,

पाएं सुख-शांति तव द्वार में।

जय जय श्री शनिदेवा, करो कृपा हे शनिदेवा।

कृपा करो हे शनिदेवा, जय जय श्री शनिदेवा।